Karan Johar अपने पिता और फिल्ममेकर यश जौहर की बर्थ एनिवर्सरी पर उन्हें याद कर भावुक हो गए। करण ने अपने पिता से जुड़े कंई किस्से…
दिवंगत फिल्ममेकर यश जौहर (Yash Johar) की आज बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर उनके बेटे और फिल्ममेकर करण जौहर (Karan Johar) ने उन्हें याद किया है। दरअसल करण ने अपने बचपन की कंई तस्वीर शेयर करते हुए अपने पिता को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता से जुड़े कंई किस्से भी सुनाए है।
Karan Johar ने सुनाया पिता यश से जुड़ा किस्सा
दरअसल अपने पिता की बर्थ एनिवर्सरी पर करण जौहर ने उनके साथ बिताए पुराने समय को याद किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे आज भी याद है उस समय कुछ कुछ होता है’ फिल्म रिलीज हुई थी और जश्न के लिए मैंने अपनी पहली डिजाइनर जैकेट खरीदी थी। मैं बड़े ही गर्व के साथ बर्बरी के स्टोर में गया और मैंने केवल वो एक जैकेट खरीदी जो मुझे फिट हो रही थी (वो मेरे मेगा प्लस साइज के दिन थे), मैंने उसे पहना और मुझे लगा कि मैं उसमें काफी अच्छा लग रहा था।”
“मेरे पिता ने उलझन के साथ मेरी तरफ देखते हुए पूछा- ‘बेटा ये क्या है ?’ मैंने उन्हें बताया कि- ‘पापा ये बर्बरी है।’ तब उन्होंने एक गहरी पंजाबी साँस ली और कहा- ‘बेटा ये बर्बरी नहीं …बल्कि बहुत बुरी है।’ मैं एकदम से टूट गया और और तभी जोर-जोर से हँसने लगा। मेरे पिता ऐसे ही थे- जमीन से जुड़े हुए, साधारण और बहुत ही मजाकिया।”

करण को हीरो बनाना चाहते थे उनके पिता यश जौहर
Karan Johar ने अपने पिता के बारे में बात करते हुए आगे लिखा, “वो मेरे सबसे बड़े फैन थे। उस समय भी जब मैं ऐसा दिखता था कि मैंने पुरे देश का खाना खा लिया है और मैं एक टाइट पैंट की ज़िप बंद करने की कोशिश कर रहा हूँ, तब भी वे कहते थे- ‘पप्पी फैट है… चला जाएगा।’
“इसके अलावा भी कंई अन्य मौकों पर वे कहते थे कि- ‘तू इतना हैंडसम है, हीरो बन जा। घुड़सवारी क्यों नहीं सीखता ?’ क्या आप सोच सकते है कि मैं जुहू बीच पर घुड़सवारी कर रहा हूँ और क्या आप मुझे एक मेनस्ट्रीम हीरो के रूप में सोच सकते है ? पापा के राजा बेटा वाले भ्रम के बाद मेरी माँ मुझे एक तरफ ले जाती थी और कहती थी कि- ‘बेटा तुम कैमरे के सामने नहीं रह सकते और खासकर घोड़े पर तो बिल्कुल भी नहीं’।”
Karan Johar ने आखिरी पलों में पिता से किया था ये वादा
लेकिन मेरे पापा मेरे हीरो थे। उनकी सीख, उनकी दयालुता, उनकी उदारता और उनके निस्वार्थ रहने की क्षमता इतनी अधिक थी कि कंई बार ये अमानवीय लगती थी। अपने अंतिम दिनों में अपने कीमो सेशन के बाद उन्होने मुझे कहा कि- “मैं तुम्हे और तुम्हारी मॉम को छोड़कर नहीं जाना चाहता लेकिन ऐसा लग रहा है कि मैं जा रहा हूँ। मुझसे वादा करो कि तुम हमेशा दयालु रहोगे। अगर तुम दयालु नहीं हो तो सफलता का मतलब कुछ भी नहीं है और अपनी माँ का ध्यान रखना, जैसे मैं रखता हूँ।”

“जब वे वेंटिलेटर पर थे और मुझे पता था कि अब उम्मीद की कोई भी किरण नहीं बची है। मुझे पता है कि कुछ तो था जो कि उन्हें दूसरी तरफ जाने से रोक रहा था। तब मैंने चुपके से उनके कान में कहा- ‘पापा मैं वादा करता हूँ मैं माँ का ख्याल वैसे ही रखूँगा, जैसे कि एक पेरेंट अपने बच्चे का रखता है।”
अपने पिता को हर रोज याद करते हुए Karan Johar
Karan Johar ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा, “तभी उनका लेवल गिरने लगा और बहुत जल्द ही वे हम सब को छोड़कर चले गए। वो केवल यही सुनने का इंतजार कर रहे थे। वे 22 साल पहले मेरी जिंदगी में एक ऐसा खालीपन छोड़कर चले गए, जिसे मैं कभी नहीं भर सकता। जब आप के पेरेंट को खोते हो तो आप एक भगवान को पा लेते हो। मैं हर रोज उनसे प्रार्थना करता हूँ, मेरे लिए इससे बड़ा और क्या आशीर्वाद हो सकता है। पापा मैं आपको हर रोज मिस करता हूँ।”






